शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन कमजोरी देखने को मिली। गैप-डाउन ओपनिंग के बाद पूरे सत्र में बिकवाली का दबाव बना रहा, और बाजार हल्की रिकवरी के बावजूद लाल निशान में बंद हुआ। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों की धड़कनें बढ़ा दीं। कैसा रहा आज का बाजार BSE सेंसेक्स 120.83 अंक यानी 0.16% गिरकर 74,781.76 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 79.70 अंक यानी 0.34% टूटकर 23,398.10 के स्तर पर आ गया। कारोबार के दौरान एक समय निफ्टी 23,250 के नीचे तक फिसल गया था और सेंसेक्स में इंट्राडे 700 अंकों तक की गिरावट देखी गई, हालांकि दिन ढलते-ढलते बाजार ने कुछ नुकसान की भरपाई कर ली। बाजार का रुझान साफ तौर पर कमजोर रहा — BSE पर 2,018 शेयर हरे निशान में रहे तो 2,470 शेयर लाल निशान में बंद हुए, यानी बिकवाली का पलड़ा भारी रहा। किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा दबाव रियल एस्टेट, मेटल और ऑटो शेयरों में सबसे तेज गिरावट दर्ज हुई, जबकि IT शेयरों ने व्यापक कमजोरी के बीच भी मजबूती दिखाई। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 2.70% गिरकर 848.50 पर आ गया — लगातार छठे सत्र में यह इंडेक्स नीचे गया है। गोदरेज प्रॉपर्टीज करीब 6.6%, लोढ़ा डेवलपर्स साढ़े 4%, आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट और प्रेस्टीज एस्टेट्स भी 3-4% तक टूटे। DLF और ओबेरॉय रियल्टी में भी नरमी रही। गिरावट की मुख्य वजह: महंगा होता कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड गुरुवार को करीब 6% उछलकर 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था और शुक्रवार को भी 108 डॉलर के आसपास कारोबार करता रहा। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की वजह से सप्लाई चेन पर असर पड़ने की आशंका ने ऊर्जा कीमतों को हवा दी है, जिसका सीधा असर महंगाई और ब्याज दरों की उम्मीदों पर पड़ रहा है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड 5% के करीब पहुंच गई, जिसने वैश्विक बाजारों पर भी दबाव डाला — डाओ जोंस, S&P 500 और नैस्डैक तीनों गुरुवार को लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ बंद हुए थे। FII-DII और IPO मोर्चे पर हलचल विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बिकवाली जारी रखी, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा दिया। इसी बीच प्राइमरी मार्केट में गर्मी बनी रही — रेंटोमोजो का IPO 71 गुना और करमतारा इंजीनियरिंग का इश्यू करीब 61 गुना सब्सक्राइब हुआ, जो दिखाता है कि निवेशकों का भरोसा हर सेगमेंट में एक जैसा नहीं है। आगे क्या उम्मीद करें अगले हफ्ते अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक और भारत में 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स समिट पर बाजार की नजर रहेगी। जब तक कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और इसे निवेश सलाह न समझें। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। आपकी राय: क्या आपको लगता है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें अगले हफ्ते बाजार पर और दबाव डालेंगी? कमेंट में बताएं।